हमारा परिवार

मेरा नाम अरविंद कुमार आर्यन है मैं बिहार राज्य के पूर्वी चंपारण जिले के थाना ढाका में  एक गांव विसरहिया में रामानंद साह के सबसे छोटे पुत्र के रूप में जन्म हुआ। मेरे पिताजी एक शिक्षित व्यक्ति हैं उनकी नौकरी जन वितरण प्रणाली में है, उनका स्वभाव बहुत विनम्र है वह कोई काम साहस बुद्धि विवेक तथा अपने सहनशक्ति से कुछ ज्यादा करते हैं वे हरदम अपने परिवार तथा समाज को खुश रखने के लिए प्रयत्न करते रहते हैं वह कोई भी काम बड़ी सरलता से सोच समझकर करते हैं वह हमेशा कोई भी काम के लिए सतर्क रहते हैं 
                            उनकी सोच:-
उनकी सोच के बारे में बहुत ज्यादा मालूम नहीं है मगर एक बात मैं कहूंगा कि इंसान की सोच और जिज्ञासा को इंसान भी नहीं समझ पाया है आज ₹10 है तो कल वही सोच और जिज्ञासा से हम चाहेंगे कि वह ₹100 हो तो काश कोई और काम करते इस तरह इंसान की जिज्ञासा को कोई दूसरा इंसान नहीं समझ पाते हैं 
                               उनका काम:-
उनका काम बहुत छोटा मगर बड़ा है वह अपने काम के प्रति हमेशा सतर्क रहते हैं उनको अपने काम से फुर्सत नहीं मिलती है वह तो खाना नहीं खा पाते हैं कभी कभी उनको अपने काम से कहीं जाना होता है और खाना नहीं बना रहता है तो वह भूखे चले जाते हैं फिर उस काम में क्यों ना सुबह से शाम हो जाए जब तक काम नहीं होता तब तक सही से खाना नहीं खाते हैं 
उदाहरण:- 
एक बार की बात है कि एक दिन उनको राशन लाने जाना था तो वह सुबह ही निकल गए लगभग 1:00 बजे राशन लेकर आए फिर तेल के लिए जाना था तो राशन उतरवाकर तेल लाने चले गए, खाना भी नहीं खाए फिर उधर से तेल लेकर आए तब तक शाम हो गयी थी तब जाकर खाना खाए। मैं शायद ऐसे व्यक्ति की तुलना काम से करूं तो काम को भी शर्म आ जाती है और वो हार जाएगा काम के प्रति सतर्क रहने वाला आदमी हम पहली बार देखा इसलिए कहा भी गया है कि जो समय के साथ चलता है वह बहुत आगे बढ़ जाता है समय के साथ नहीं चलता वह बहुत पीछे रह जाता है।
                                उनका पसंद:- 
उनका पसंद भोजन में किया जाए तो उनको चाय बहुत पसंद है 8 से 10 कफ चाय पी जाते हैं रोज खाने पीने के बाद उनको पान खाने की आदत है। वह हमेशा अपने परिवार को खुश देखना चाहते हैं घर में किसी भी वस्तु की कमी को महसूस नहीं होने देते है पहले से ही लाकर रख देते हैं जिससे घर के सदस्यों को कोई तकलीफ ना हो
  दुनिया में कोई भी ऐसा घर नहीं जहाँ कलह, ना हो यह सब जिन जिन लोगों में होता है वह कभी आगे नहीं बढ़ है, वह घर स्वर्ग से नरक हो जाता है जरा सोचे हमारा जीवन 60 साल का है, हम खुशियां मनाई जाती है मिठाइयां बांटी जाती है फिर से 10 साल तक बने रहते हैं जो आगे मौत की है और हर साल जन्म दिन मेरे मौत के आने की खुशी में मनाई जाती है फिर देते हैं शादी होती है अब को संभालना बीवी को देखना है माता पिता के साथ अपने देश के बारे में भी सोचना है उनके मुंह देखकर हम नहीं सोच पाते कि मौत हमारा इंतजार कर रही है जैसे नदी के किनारे बैठे को तैयार रखती है कि कब मछली आएगी आए और हम मछली जानकर भी अनजान बन जाती अपने बच्चों के लिए भोजन खोजने जाती है और खुद मौत के मुंह में शिकार बन जाती है ठीक उसी प्रकार हम लोग का भी यही नियम है हम जानते हैं कि हमारी मौत पल-पल हमारे इंतजार कर रही है पल-पल हमें बुला रही है और हम हैं तो इस माया जाल में फंसे हुए सोचो अगर महात्मा गांधी का जन्म नहीं होता तो क्या होता है तो क्या हम




आज आज आजाद होते उनका जन्म हुआ तो यह दुनिया को देख कर दुनिया को समझो दुनिया से अच्छाई के लिए दुनिया के साथ अपना भी सोच रखें तब जाकर भारत आजाद हुआ वह भी तो एक इंसान ही थे यह बन सकते हैं तो हम क्यों नहीं बन सकते हम भी बन सकते मगर हमें कुछ बुराइयों को छोड़ने को होगी जो क्रोध गमन इससे गिरना पाप छूट इत्यादि को छोड़ने में हमें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है पर हम जानते हैं कि सच की ही जीत होती है स अभी ना हो पर कभी ना कभी जरूर होगी लेकिन सच की ही जीत होगी अगर हम समय के साथ अपने दिमाग सोचता ईमान का साथ देते हुए चलेंगे तो हम सोते उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे हमारी मंजिल है हमें अपने में कुछ बनना है जो कोई ना बना हो हमें ऐसा काम करना चाहिए जो इंसान के साथ सत्ता की टिकट भी पढ़ान वाले जीवो के लिए भी अच्छा हो




मेरे पिताजी की सबसे बड़ी कमजोरी उस व्यक्ति पर बिना सोचे समझे विश्वास कर लेना है

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